अमेरिका और चीन के बीच लगातार बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक संकेत सामने आया है। जहां एक ओर अमेरिका ने चीन से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 145% कर दिए हैं, वहीं चीन ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सामानों पर 125% का भारी टैरिफ लगाया है।
इसी तनावपूर्ण माहौल में चीन ने एक ऐसा कदम उठाया है जो भारत के साथ उसके संबंधों को नई दिशा दे सकता है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, चीन ने हाल ही में 85,000 भारतीय नागरिकों को वीज़ा जारी किए हैं, जो कि अब तक का एक रिकॉर्ड आंकड़ा है।
इन वीज़ा धारकों में मुख्य रूप से छात्र, व्यापारी, शोधकर्ता और कामकाजी पेशेवर शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह चीन की ओर से भारत को दिया गया एक सकारात्मक संकेत है — एक ऐसा संकेत जो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की मंशा को दर्शाता है।
इस मुद्दे पर भारत में मौजूद चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बयान देते हुए कहा:
“अमेरिका द्वारा टैरिफ का दुरुपयोग किया जा रहा है। चीन और भारत दोनों को मिलकर इसका विरोध करना चाहिए क्योंकि हमारे आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते परस्पर लाभकारी हैं।”
क्या है चीन की रणनीति?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अमेरिका के खिलाफ अपना मोर्चा मज़बूत करने के लिए भारत जैसे विकासशील और रणनीतिक रूप से अहम देशों को अपने करीब लाने की कोशिश कर रहा है। वीज़ा जारी करना, भारत के प्रति goodwill बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत करने की इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
हालांकि भारत सरकार ने अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे गंभीरता से देखा जा रहा है।
क्या भारत अमेरिका या चीन, किस ओर झुकेगा?
इस सवाल का जवाब आने वाले समय में भारत की विदेश नीति और व्यापारिक प्राथमिकताओं से मिलेगा। फिलहाल, भारत अमेरिका और चीन दोनों के साथ स्वतंत्र रणनीति बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।


