नई दिल्ली, 26 फरवरी 2024:
एक एनआरआई महिला, श्वेता शर्मा, ने आईसीआईसीआई बैंक के एक अधिकारी पर ₹16 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। महिला ने अपनी जीवन भर की बचत बैंक में जमा की थी, लेकिन फर्जी खातों और जाली दस्तावेजों के जरिए उनका पूरा पैसा ठग लिया गया।
घटना का विवरण:
श्वेता शर्मा, जो पहले अमेरिका और हांगकांग में रहती थीं, ने 2019 में आईसीआईसीआई बैंक की गुरुग्राम शाखा में एनआरई खाता खोला था।
उन्होंने अपनी बचत ₹13.5 करोड़ की रकम बैंक में जमा की, जिसे 5.5% से 6% ब्याज पर फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया गया।
बैंक अधिकारी ने उनके नाम से फर्जी ईमेल आईडी, जाली सिग्नेचर, डेबिट कार्ड और चेकबुक तैयार किए।
कैसे हुआ खुलासा:
दिसंबर 2023 में एक अन्य बैंक कर्मचारी ने बेहतर रिटर्न की पेशकश की, जिसके बाद धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ।
जांच में पता चला कि सभी फिक्स्ड डिपॉजिट गायब थे और ₹2.5 करोड़ का ओवरड्राफ्ट उनके खाते पर लिया गया था।
बैंक का बयान:
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा, “ग्राहकों का विश्वास हमारी प्राथमिकता है। हमने ₹9.27 करोड़ की विवादित राशि ग्राहक के खाते में जमा करने की पेशकश की है।”
बैंक ने यह भी कहा कि सभी लेनदेन की जानकारी महिला के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पर भेजी गई थी।
बैंक ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में मामले की शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता का बयान:
श्वेता शर्मा ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने उन्हें फर्जी स्टेटमेंट दिए और बैंक रिकॉर्ड में उनका मोबाइल नंबर बदल दिया, ताकि उन्हें लेनदेन की कोई सूचना न मिले।
उन्होंने कहा, “चार साल में हमने अपनी पूरी बचत जमा की, लेकिन अब सब खत्म हो गया।”
जांच जारी:
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी। हालांकि, घटना को उजागर हुए छह हफ्ते बीत चुके हैं और अभी तक पीड़िता को न्याय नहीं मिला है।
यह मामला बैंकिंग प्रणाली और ग्राहकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


