बेंगलुरु:
भारतीय मूल की बाल प्रतिभा और आविष्कारक गितांजलि राव ने बताया कि उनके आविष्कारों और सफलता के पीछे उनके समुदाय, परिवार और स्कूल द्वारा दिए गए सहायक वातावरण का बड़ा योगदान है।
अमेरिका में भारतीय मिशन द्वारा आयोजित डायस्पोरा डिप्लोमेसी स्पीकर सीरीज में गितांजलि ने अपने अनुभव, विचार प्रक्रिया और आगामी आविष्कारों पर चर्चा की।
जल में सीसा स्तर की जांच के लिए बनाया ‘Tethys’ डिवाइस
16 वर्षीय गितांजलि राव, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रही हैं, ने ‘Tethys’ नामक डिवाइस बनाया है जो पानी में सीसा स्तर का पता लगाता है और जानकारी ब्लूटूथ के माध्यम से प्रसारित करता है।
उन्होंने कहा, “मैंने अपने माता-पिता को पानी में सीसा स्तर की जांच करते हुए देखा और पाया कि यह प्रक्रिया बहुत जटिल, महंगी और अविश्वसनीय थी।” उन्होंने फ्लिंट वाटर क्राइसिस से प्रेरणा ली, जिसमें लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता था।
नए आविष्कारों पर लगातार काम
गितांजलि हर साल एक नए आविष्कार पर काम करती हैं। उनकी अन्य परियोजनाओं में ओपियेट की लत का पता लगाने वाला उपकरण, ‘Kindly’ नामक साइबरबुलिंग फिल्टर, और सोशल मीडिया पर फोटो में किए गए बदलावों का पता लगाने का एक तरीका शामिल है, जिसका उद्देश्य किशोरों का आत्मविश्वास बढ़ाना और अवसाद के मामलों को कम करना है।
समाज में बदलाव लाने की प्रेरणा
गितांजलि ने कहा, “मैं समाज में प्रभाव डालना चाहती हूं। मैं सरल समाधान के माध्यम से जटिल समस्याओं को हल करना चाहती हूं।”
स्कूलों में समस्या-आधारित सीखने की जरूरत
गितांजलि ने शिक्षा प्रणाली में समस्या-आधारित सीखने को अपनाने की वकालत की। उन्होंने कहा, “हम स्कूलों के असली उद्देश्य को भूल गए हैं, जो हमें असल जीवन के लिए तैयार करना है। परीक्षा और नंबरों के पीछे भागने के बजाय, हमें सीखने और सोचने का सरल तरीका चाहिए।”
उन्होंने अपने कंप्यूटर तकनीशियन क्लास का उदाहरण दिया, जहां उन्हें एक लैपटॉप को खोलकर दोबारा जोड़ने के आधार पर अंक दिए गए।
विफलता को कलंकित करने से बचने की जरूरत
गितांजलि ने कहा, “बच्चों को ऐसा वातावरण चाहिए जहां उनकी वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाए और विफलता को कलंकित न किया जाए।”
गितांजलि राव का यह दृष्टिकोण दिखाता है कि कैसे युवा आविष्कारक नई पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं और समाज के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।



