नई दिल्ली: प्रवासी भारतीयों (NRIs) को संसद में प्रतिनिधित्व देने की मांग हाल ही में संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति की बैठक में उठाई गई। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सुझाव दिया कि इटली जैसे देशों की तरह भारत को भी प्रवासी नागरिकों के लिए संसद में आरक्षित सीटें रखनी चाहिए, ताकि उनके मुद्दों को प्रभावी रूप से उठाया जा सके।
बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की, जिसमें केरल की नॉरका रूट्स, पंजाब सरकार का NRI विभाग, पीपल ऑफ इंडियन ओरिजिन चैंबर ऑफ कॉमर्स और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात का सेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज जैसी संस्थाओं ने भाग लिया।
प्रवासियों के लिए नए अवसरों की चर्चा
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भारत से विदेश जाने वाले कुशल श्रमिकों के लिए एक नई योजना लाई जाए, जिससे उनकी योग्यता को विदेशी देशों की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जा सके। इससे अवैध प्रवास और मानव तस्करी जैसी समस्याओं को रोका जा सकेगा।
एनआरआई को वोटिंग अधिकार देने पर चर्चा
वर्तमान में, एनआरआई भारत में मतदान नहीं कर सकते जब तक कि वे खुद भारत आकर वोट न डालें। 2018 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एनआरआई के लिए प्रॉक्सी वोटिंग की सुविधा देने वाला एक बिल पेश किया गया था, लेकिन वह बाद में लैप्स हो गया।
नए इमिग्रेशन बिल पर विचार जारी
संसदीय समिति ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि प्रवासियों से जुड़े मुद्दों पर कोई नया विधेयक आएगा या नहीं। मंत्रालय ने जानकारी दी कि इस पर विचार किया जा रहा है, और आगे की चर्चा जारी है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रवासी भारतीयों को भारत की संसद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए? क्या यह कदम एनआरआई समुदाय के हितों की बेहतर रक्षा कर सकता है?
इस विषय पर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में हमें बताएं और ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए NRI Matters TV News से जुड़े रहें।



